Biography of Indira Gandhi,भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कि जीवनी

Safalta Expert Published by: Chanchal Singh Updated Fri, 13 Jan 2023 11:38 AM IST

Biography of Indira Gandhi : महान बनने के लिए हिम्मत चाहिए, मिशाल कायम करने के लिए हिम्मत चाहिए, और इनमे तो इतनी ज्यादा हिम्मत थी कि इन्होंने तो देश को आज़ाद करा दिया। यह एक ऐसी इंसान थी जिनका बहोत ज्यादा ही आलोचना हुआ, जिनको चुडेल तक बोला गया, इनको खुद कि ही पार्टी वालो ने कहा कि आप इस्तीफा दे दो। इतने सारे कठिनाई का सामना कर के इन्होंने देश के लिए काम किया। इन्होंने गरीबों के लिए काम किया, भारत को साइंस टेक्नोलॉजी के मामले मे बहोत आगे ले आई। गरीबी हटाओ नारा दिया, जी हां हम बात इन्दिरा गांधी कि कर रहे हैं। इन्दिरा प्रियदर्शिनी गाँधी  (19 नवंबर 1917-31 अक्टूबर 1984) वर्ष 1966 से 1977 तक लगातार 3 पारी के लिए भारत गणराज्य की प्रधानमन्त्री रहीं और उसके बाद चौथी पारी में 1980 से लेकर 1984 में उनकी राजनैतिक हत्या तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं। वे भारत की प्रथम और अब तक एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं।इन्दिरा का जन्म 19 नवम्बर 1917 को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नेहरू परिवार में हुआ था। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू और इनकी माता कमला नेहरू थीं। इन्दिरा को उनका "गांधी" उपनाम फिरोज़ गाँधी से विवाह के पश्चात मिला था। इनके पिता जवाहरलाल नेहरू भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के एक प्रमुख व्यक्तित्व थे और आज़ाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री रहे।

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1934–35 में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के पश्चात, इन्दिरा ने शान्तिनिकेतन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा निर्मित विश्व-भारती विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ही इन्हे "प्रियदर्शिनी" नाम दिया था। इसके पश्चात यह इंग्लैंड चली गईं और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में बैठीं, परन्तु यह उसमे विफल रहीं और ब्रिस्टल के बैडमिंटन स्कूल में कुछ महीने बिताने के पश्चात, 1937 में परीक्षा में सफल होने के बाद इन्होने सोमरविल कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में दाखिला लिया। इस समय के दौरान इनकी अक्सर फिरोज़ गाँधी से मुलाकात होती थी, जिन्हे यह इलाहाबाद से जानती थीं और जो लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में अध्ययन कर रहे थे। अंततः 16 मार्च 1942 को आनंद भवन, इलाहाबाद में एक निजी आदि धर्म ब्रह्म-वैदिक समारोह में इनका विवाह फिरोज़ से हुआ। 1959 और 1960 के दौरान इंदिरा चुनाव लड़ीं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयीं। उनका कार्यकाल घटनाविहीन था। वो अपने पिता के कर्मचारियों के प्रमुख की भूमिका निभा रहीं थीं। 
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नेहरू का देहांत 27 मई, 1964 को हुआ और इंदिरा नए प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के प्रेरणा पर चुनाव लड़ीं और तत्काल सूचना और प्रसारण मंत्री के लिए नियुक्त हो, सरकार में शामिल हुईं। सन् 1966 में जब श्रीमती गांधी प्रधानमंत्री बनीं, कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो चुकी थी, श्रीमती गांधी के नेतृत्व में समाजवादी और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में रूढीवादी। मोरारजी देसाई उन्हें "गूंगी गुड़िया" कहा करते थे। 1967 के चुनाव में आंतरिक समस्याएँ उभरी जहां कांग्रेस लगभग 60 सीटें खोकर 545 सीटोंवाली लोक सभा में 297 आसन प्राप्त किए। उन्हें देसाई को भारत के भारत के उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में लेना पड़ा। Daily Current Affairs Questions: यहां  August के करेंट अफेयर्स प्रश्न देखें
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शिक्षा


 इंदिरा गांधी ने पुणे विश्वविद्यालय से मैट्रिक पास किया और पश्चिम बंगाल में शांति निकेतन से भी थोड़ी शिक्षा हासिल की थी। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए स्विट्जरलैंड और लंदन में भी सोमरविले कॉलेज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने गई थी। साल 1936 के दौरान उनकी मां कमला नेहरू तपेदिक से बीमार हो गई थी जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही इंदिरा ने स्विट्जरलैंड में कुछ महीने अपनी बीमार मां के साथ बिताए थे ।इसके बाद कमला नेहरू की मृत्यु के समय इनके पिता जवाहरलाल नेहरू भारतीय जेल में बंद थे।

 इंदिरा गांधी के विवाह और पारिवारिक जीवन के बारे


इंदिरा गांधी जब इंडियन नेशनल कांग्रेस की सदस्य बनी तब उनकी मुलाकात फिरोज गांधी से हुई। फिरोज गांधी उस दौरान पत्रकार और यूथ कांग्रेस के महत्वपूर्ण सदस्य थे। 1941 में अपने पिता की असहमति के बावजूद भी इंदिरा गांधी ने फिरोज गांधी से शादी कर लिया था। इंदिरा गांधी ने पहले राजीव गांधी और उसके 2 साल बाद संजय गांधी को जन्म दिया था। इंदिरा गांधी का विवाह फिरोज गांधी से हुआ था। और महात्मा गांधी में कोई रिश्ता नहीं था फिरोज उनके साथ स्वतंत्रता के संघर्ष में आए थे लेकिन  फिरोज पारसी थे। जबकि इंदिरा गांधी हिंदू परिवार से ताल्लुक रखती थी और उस समय अंतरजातीय विवाह इतना चलन नहीं था। दरअसल उस समय इंदिरा और फिरोज गांधी के जोड़ी को सार्वजनिक रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा था। ऐसे में महात्मा गांधी ने इनके विवाह को समर्थन दिया।  महात्मा गांधी ने ही राजनीतिक छवि बनाए रखने के लिए महात्मा गांधी ने फिरोज और इंदिरा को गांधी सरनेम लगाने का सुझाव दिया था। स्वतंत्रता के बाद इंदिरा गांधी के पिता यानी पंडित जवाहरलाल नेहरू को देश का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया। तब इंदिरा गांधी अपने पिता और बच्चों के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गई थी। उनके दोनों बेटे उनके साथ आए लेकिन उनके पति फिरोज गांधी ने इलाहाबाद में ही रुकने का निर्णय लिया, क्योंकि फिरोज गांधी उस दौरान नेशनल हेराल्ड में एडिटर के पद पर काम कर रहे थे। यह न्यूज़ पेपर की शुरूआत मोती लाल नेहरू ने किया था।


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 इंदिरा गांधी का राजनैतिक सफर


  इंदिरा गांधी का राजनीति में आना उतना मुश्किल और आश्चर्यजनक नहीं था उन्होंने बचपन से ही महात्मा गांधी को अपने इलाहाबाद के घर में आते-जाते देखा था। इसलिए इनकी देश और यहां की राजनीति में रुचि रही थी। 1991 और 1951 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी ने अपने पति फिरोज गांधी के लिए बहुत सारी चुनाव सभा आयोजित किया और उनके समर्थन में चलने वाली चुनाव अभियान का नेतृत्व किया था। उस समय फिरोज गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ रहे थे। जल्दी फिरोज सरकार के भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ा चेहरा बनने लगा उन्होंने बहुत से भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों का पर्दाफाश किया। जिसमें बीमा कंपनी और वित्त मंत्री टीटी कृष्णमाचारी का नाम शामिल था। वित्त मंत्री को जवाहरलाल नेहरू का करीबी माना जाता था इस तरह फिरोज राष्ट्रीय स्तर की बड़े राजनीति की चेहरे के रूप में सामने आए और थोड़े समर्थकों के साथ उन्होंने केंद्र सरकार के साथ संघर्ष करना जारी रखाष लेकिन 8 सितंबर 1960 को फिरोज गांधी की मृत्यु हो गई थी।


 कांग्रेस प्रेसिडेंट के रूप में इंदिरा गांधी


 1959 में इंदिरा को इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी का प्रेसिडेंट चुना गया था। वह जवाहरलाल नेहरू के प्रमुख एडवाइजर टीम में शामिल थी। 27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी ने चुनाव लड़ने का फैसला लिया और वह जीत भी गई। उन्हें लाल बहादुर शास्त्री की सरकार में इनफार्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मंत्रालय सौंपा गया था। प्रधानमंत्री के तौर पर इंदिरा गांधी का सफर 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद में देहांत के बाद अंतिम चुनाव में इंदिरा गांधी ने बहुमत से विजय हासिल किया और प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाला था।
 
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इंदिरा गांधी ने  आपत्कालीन लागू किया था आइए जानते हैं इसके बारे में


 1975 में विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बढ़ती इन्फ्लेशन, खराब अर्थव्यवस्था और नियंत्रण केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ जिस साल इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि इंदिरा गांधी ने पिछले चुनाव के दौरान अवैध तरीके से इस्तेमाल किया और मौजूदा परिस्थितियों में इस बात ने इस फैसले में इंदिरा गांधी को तुरंत प्रधानमंत्री पद से हटने का आदेश दिया गया था। जिस कारण लोगों में उनके प्रति क्रोध बढ़ गया जिसके बाद इंदिरा गांधी ने 26 जून 1975 के दिन प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बजाय देश में अशांत राजनीतिक स्थिति के कारण आपातकाल घोषित कर दिया। आपातकाल के दौरान उन्होंने अपने सभी राजनीतिक दुश्मनों को कैद करवा दिया और उस समय नागरिकों के संवैधानिक अधिकार  को रद्द कर दिया था। साथ ही प्रेस को भी सख्त सेंसरशिप के तहत रखा गया था। सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस  ऐप से करें फ्री में प्रिपरेशन - Safalta Application


 इंदिरा गांधी के अवार्ड


1971 में इंदिरा गांधी को भारत रत्न सम्मान किया गया था
1972 में बांग्लादेश को आजाद करवाने के लिए मेक्सिकन अवार्ड से सम्मानित किया गया था
 1976 में नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा हिंदी में साहित्य वाचस्पति का अवार्ड दिया गया था
 1953 में यूएस में मदर्स अवार्ड दिया गया था
इसके साथ डिप्लोमेसी के साथ बेहतर काम करने के लिए इसल्बेल डी एस्टे अवार्ड ऑफ इटली दिया गया था।
 1967 और 1968 में फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन के पोल के मुताबिक वह फ्रेंच लोगों द्वारा सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाली महिला राजनेता थी।
 1971 में यूएस के विशेष गैलप पोल सर्वे के मुताबिक ये दुनिया के सबसे ज्यादा सम्मानीय महिला थी।

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निधन


प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या 31 अक्टूबर 1984 को नई दिल्ली के सफदरगंज रोड स्थित उनके आवास पर सुबह 9:29 बजे की गई थी। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उनके सिख अंगरक्षकों सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने गोली मार कर उनकी हत्या की थी। ऑपरेशन ब्लूस्टार के बाद प्रधानमंत्री गांधी के जीवन पर खतरे की धारणा बढ़ गई थी। तदनुसार, हत्या-प्रयास के डर से आसूचना ब्यूरो द्वारा सिखों को उसके निजी अंगरक्षक टुकड़ी से हटा दिया गया था। हालाँकि, गांधी की राय थी कि इससे उनकी सिख विरोधी छवि जनता के बीच मजबूत होगी और उनके राजनीतिक विरोधियों को मजबूती मिलेगी। अतः उन्होंने विशेष सुरक्षा दल को अपने सिख अंगरक्षकों को फिर से बहाल करने का आदेश दिया, जिसमें बेअंत सिंह भी शामिल थे।


इंदिरा गांधी से जुड़े फैक्ट


1.इंदिरा गांधी सबसे पहले राजनीतिक में अपना कदम लाल बहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल के दौरान साल 1964 से 1966 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्री का पद संभालते हुए किया था।

2. भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के मृत्यु के बाद नियुक्त किया गया था। फिर लालबहादुर शास्त्री के बाद इंदिरा गांधी को भारत की पहली और देश की तीसरी महिला प्रधानमंत्री बनाया गया।

3. इंदिरा गांधी ने साल 1942 में फिरोज गांधी के साथ विवाह किया था। फिरोज गांदी और इंदिरा गांधी के दो बेटे थे, उनका नाम राजीव गांधी एवं संजय गांधी था।

4. इंदिरा गांधी फिरोज गांधी को इलाहाबाद के दिनों से ही जानती थी, ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान इंदिरा गांधी की मुलाकात फिरोज गांधी से होती रहती थी फिर उस दौरान लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई कर रहे थे।

5. इंदिरागांधी और  फिरोज गांधी जैसे ही अपनी शिक्षा पूरी कि वे वापस भारत आए और दोनों ने शादी कर ली।

6. इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की शादी 16 मार्च 1942 को आनंद भवन इलाहाबाद में हुई थी।

7. इंदिरा गांधी के शासनकाल के दौरान भारत के संविधान के मूल स्वरूप का संशोधन जितना हुआ है था उतना किसी प्रधानमंत्री के कार्यकाल और शासनकाल के दौरान नहीं हुआ है।

8. जब फिरोज गांधी और इंदिरा गांधी लंदन में रहा करते थे तब उन्हें भारतीय भोजन खाने की इच्छा होती थी तब उनके लिए नारायण हक्सर भोजन बनाया करते थे। 

9.आपको बता दें कि राजनीति के शुरुआती दिनों में इंदिरा गांधी को सार्वजनिक मंच में बोलने पर नर्वसनेस और हिचकिचाहट महसूस होती थी। 

10.इस बात की पुष्टी जीवन भर इंदिरा गांधी के डॉक्टर रहे डॉक्टर माथुर ने बताया है कि 1969 में जब उनको बजट पेश करना था तब वह इतना डरी हुई थी कि उनकी आवाज ही निकल नहीं रही थी और घबराहट के मारे वह कुछ बोल नहीं पाई ऐसे में विपक्ष नेता ने उन्हें गूंगी गुड़िया कहा था।

11. मिंक कोर्ट और रेशम की साड़ी वाले अपने लुक में इंदिरा गांधी ने पूर्व एवं पश्चिम के व्यक्तिगत पसंद को मिला कर रखा था, एक तरफ जहां वह वोग मैगजीन छपी अच्छी फोटो की तारीफ करती थी, वहीं दूसरी तरफ तड़कीले - भड़कीले फोटो को ना पसंद किया करती थी।

12. इंदिरा गांधी को खत लिखना बहुत पसंद था गिफ्ट के साथ एक नोट या फिर लंबी चिट्ठियां लिखने का उन्हें बड़ा शौक था ।

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